Reformation Movement in hindi-धर्म सुधार आन्दोलन का अर्थ

0
114
views

आज हम जानेंगे धर्म सुधार आन्दोलन (Reformation Movement) के बारे में की इसका अर्थ क्या है यह क्यों हुआ साथ ही इसके कारण और परिणामो को।

Reformation-Movement-in-hindi-धर्म-सुधार-आन्दोलन-का-अर्थ

धर्म सुधार आन्दोलन

धर्म सुधार आन्दोलन (Reformation Movement) शब्द यूरोप के इतिहास में पुनर्जागरण के उत्तरकाल में हुए दो प्रमुख परिवर्तनों के लिए प्रयुक्त होता है, इनमे प्रथम था “प्रोटेस्टेंट धर्म सुधार” इसके कारण इसाई धर्म में फूट पैदा हुई अनेक राष्ट्र रोमन कैथोलिक चर्च से अलग हो गए और उन देशो में सामान्यतया राष्ट्रीय स्तर पर पृथक्क चर्चो की स्थापना हुई।

दूसरा परिवर्तन रोमन कैथोलिक चर्च के भीतर हुए उन सुधारों से सम्बंधित था जिन्हें आमतौर पर कैथोलिक धर्म सुधार या प्रति धर्म सुधार के नाम से जाना जाता है।



आन्दोलन के कारण

पुनर्जागरण ने धर्म सुधार आन्दोलन (Reformation Movement) को प्रभावित किया, क्योकि पुनर्जागरण से सम्पूर्ण यूरोप को एक नई दिशा मिली, लोगो के अन्दर तार्किक दृष्टिकोण में वृद्धि हुई व्यापारी वर्ग धार्मिक कानुनो से परेशान था सोलहवी सदी तक अंतर्राष्ट्रीय पैमाने पर व्यापार होने लगा था।

व्यापार-व्यवसाय के लिए पूँजी की आवश्यकता थी व्यापारी या सेठ साहूकार ब्याज पर पूँजी लगाना पसंद करते थे, लेकिन चर्च सूदखोरी का विरोधी था।

महान पाश्चात्य विभाजन – दो पोप का निर्वाचन हुआ एक फ़्रांस का प्रतिनिधित्व कर रहा था एवं दूसरा इटली का प्रतिनिधित्व कर रहा था। परिणामस्वरुप संघर्ष आरम्भ हो गया और कुछ ने परस्पर सशस्त्र युद्ध आरम्भ कर दिया, अतः जनसमुदाय में गिरजाघर के प्रति आदर और सम्मान की भावना समाप्त हो गई।

आन्दोलन के परिणाम

धर्म सुधार आन्दोलन (Reformation Movement) ने राष्ट्रीयता की भावना को बढ़ाया केवल फ़्रांस और स्पेन को छोड़कर यूरोप के अधिकांश देशो में प्रोटेस्टेंट धर्म की स्थापना हुई कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच धर्म के नाम पर युद्ध हुआ जिसे तीस वर्षीय युद्ध (1618-48 ई.) कहते है, युद्ध का केंद्र जर्मनी था।

ईसाई सम्प्रदाय की एकता अखंडता खंडित हो गई ईसाई सम्प्रदाय कैथोलिक तथा प्रोटेस्टेंट दो प्रमुख सम्प्रदायों में विभाजित हो गया, सार्वभौमिक गिरजाघर के स्थान पर राष्ट्रीय गिरजाघर स्थापित किये गए ईसाई धर्म कई सम्प्रदायों में बँट गया।



लूथर ने जिस धर्म को चलाया वह लूथेरियन कहा गया, ज्विंगली ने जिस सम्प्रदाय को चलाया वह ज्विंगली सम्प्रदाय कहलाया एवं काल्विन ने प्रेसबिटेरियन संप्रदाय को जन्म दिया यूरोप में राष्ट्रीय राज्यों की स्थापना के साथ ही राष्ट्रीय भाषाओ का विकास हुआ।

अब तक लैटिन भाषा ही ईसाई जगत की भाषा समझी जाती थी लेकिन धर्म सुधार के बाद परिस्थितियाँ बदल गई स्वयं सुधार के स्तम्भ मार्टिन लूथर ने बाइबिल का अनुवाद जर्मन भाषा में किया लैटिन का महत्त्व जाता रहा धर्म सम्बन्धी सभी साहित्य राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवादित एवं प्रकाशित होने लगे।

ईसाई धर्म के प्रमुख सम्प्रदाय – प्रोटेस्टेंट, कैथोलिक, लुथेरियन, ज्विंगली और प्रेसबिटेरियन।

रोजाना ऐसे ही ज्ञानपूर्ण पोस्ट पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब ज़रूर करे सब्सक्राइब करने के लिए bell icon को click करके वेब नोटीफिकेशन को चालु कर दीजिये या फिर आप हमें अपने ईमेल के द्वारा भी सब्सक्राइब कर सकते है जिससे हमारा नया पोस्ट आते ही आपतक सबसे पहले पहुँच सके अगर यहाँ तक आपने पढ़ लिया है तो आपका धन्यवाद 🙂

Gyanyukt.com

Crusade information and fact in hindi | धर्मयुद्ध क्या है | Arabian Civilization history & fact in hindi|अरब की सभ्यता

Renaissance fact & information in hindi – पुनर्जागरण क्या है | What is a pressure in hindi | दाब क्या है, दाब के प्रकार

ITI (आईटीआई) करने के बाद घर बैठे सबसे अच्छे कोर्स | Development of Capitalism & fact in hindi-पूँजीवाद का विकास

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here