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History

Dutch in india in hindi|facts|डचो का भारत में आगमन

Dutch in india in hindi facts डचो का भारत में आगमन dutch empire

जब भारत में यूरोपियन देशो का आगमन हुआ तो सबसे पहले पुर्तगाली भारत आये थे और और इनका भारत में आने का मकसद था व्यापार वह भारत में व्यापार करके लाभ कमाना चाहते थे क्योकि उस दौर में भारत विश्व का सबसे अमिर देश था और उस समय में पुरे विश्व की GDP में भारत अकेले 17% योगदान देता था भारत के इन सभी चीजों को देखते हुए पूरी दुनिया के लोग भारत की ओर आकर्षित हो रहे थे उनमे से ही यूरोपवासी भी शामिल थे जो भारत की in सभी चीजों को देखते हुए भारत में व्यापर करके बहुत सारा धन कमाना चाहते थे जिससे उन्हें बहुत ज्यादा लाभ होता था साथ ही पुर्तगाली के बाद भारत में डच वासियों का आगमन भारत में हुआ|

Dutch empire in india|डच का भारत में आगमन

यूरोपियन देश पुर्तगाल के भारत आगमन के बाद dutch (डच) के लोगो का india भारत में आगमन हुआ जोकि दूसरा यूरोप का देश था जिसका भारत में प्रवेश हुआ था व्यापार के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के मसाला बाज़ारों में सीधा प्रवेश प्राप्त करना ही डचों का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य था डच के लोग होलैंड के निवासी थी आज होलैंड का नाम नीदरलैण्ड के नाम से जाना जाता है और यहाँ के निवासियो को dutch (डच) कहा जाता था,

भारत में dutch (डच) ने 1602ई. में “dutch east india company” डच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की इसे ही डच के लोगो का आगमन कहा जाता है लेकिन प्रथम डच का आगमन 1596ई. में होगया था और जो प्रथम डच व्यक्ति भारत आया था उसका नाम ‘कारनोलिस डेहस्तमान’ था।

dutch empire in india facts|डच शाशन भारत के प्रमुख तथ्य

  • भारत में व्यापार के लिए सर्वप्रथम पूँजी संयुक्त पूँजी डच शाशन ने आरम्भ किया इसको लागु करने का कारण यह था की इसमें लघु कंपनियों की रचना स्पष्ट नजर आता था।
  • डचो ने पुर्तगालियो को हराकर आधुनिक कोच्ची में 1663 में फोर्ट विलियम का निर्माण कराया था।
  • डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1602ई. में हुआ था।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में डचो की उपस्थिति 1602ई. से 1825ई. तक रहा।
  • डचो को अंग्रेजो ने 1759ई. के बेदरा के युद्ध में बुरी तरह से पराजित किया।
  • 1690 ई. तक डचो की प्रमुख व्यापारिक कोठी पुलीकट था।
  • 1690ई. के बाद डचो ने नागापटम में अपना मुख्यालय बनाया।

महत्त्वपूर्ण कोठियाँ

डचो ने भारत में व्यापार करने के लिए बहुत सरे स्थानों पर अपनी महत्त्वपूर्ण कोठियाँ बनायीं थी-

  1. मसुलीपट्टम – 1605 ई.
  2. पुलीकट – 1610 ई.
  3. विमलीपट्टम – 1614 ई.
  4. सूरत – 1616 ई.
  5. चिनसुरा – 1653 ई.
  6. कासिम बाज़ार, कड़ा, पटना, बालसोर, नागपट्टम – 1658 ई.
  7. कोचीन – 1663 ई.

डचो का पतन

भारत में बहुत दिनों तक शाशन करने के बाद धीरे-धीरे पतन होना शुरू हो चूका था और इनका पतन होने का मुख्य कारण अंग्रेज़ थे तब तक भारत में अंग्रेजो का भी आगमन हो चूका था बेदरा में हुए दोनों के मध्य युद्ध में अंग्रेजो ने डचो को बुरी तरह से हराया था इस वजह से इनका पतन होना चालू हो चूका था उस समय अंग्रेजो के तरफ से सेना का नेतृत्व “रॉबर्ट क्लाइब” ने किया था डचों के पतन के कारणों में अंग्रेज़ों की तुलना में नौ-शक्ति का कमज़ोर होना, मसालों के द्वीपों पर अधिक ध्यान देना, बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति, अत्यधिक केन्द्रीयकरण की नीति आदि को गिना जाता है।

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