वाणिज्यवाद क्या है? इसके प्रमुख तथ्य|Mercantilism facts

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वाणिज्यवाद क्या है? इसके प्रमुख तथ्य|Mercantilism facts

वाणिज्यवाद राज्य की शक्ति को बढाने के लिए राष्ट्र की अर्थव्यवस्थाओं का सरकारों द्वारा नियंत्रन को प्रोत्साहन देना है। इसका प्रारंभ सोलहवीं सदी में हुआ। अंतरराष्ट्रीयव्यापार वाणिज्यवादका आधार है।आज हम जानेंगे इसके बारे और साथ ही जानेंगे इससे जुड़े प्रमुख तथ्यों को।

source – google.com

वाणिज्यवाद एक विशेष प्रकार की नीति थी, मोटे तौर पर वाणिज्यवाद का अर्थ होता है, आर्थिक राष्ट्रवाद अर्थात राज्य के आर्थिक जीवन तथा उद्योग धंधो सम्बन्धी कार्य एवं व्यापारिक कार्यकलापो का सरकार द्वारा नियमन।

वाणिज्यवाद का उदयकाल 1600 – 1700ई. तक माना जाता है।इसे बहुत ज्यादा ही रोचक खोज कहा जाता है जो है भी



इसकी कुछ विशेषताए 1800ई. तक कायम रही। सिर्फ डच सरकार ने इस नीति को नहीं अपनाया।

वाणिज्यवाद के सिद्धांत का सबसे अधिक पालन फ्रांस में चौदहवे लुई (1643 – 1715) के शाशन काल में हुआ।

इसका का एक पहलू राज्यों द्वारा सोना-चाँदी के संचय की अनवरत कोशिश था। इसे बुलियनवाद भी कहा जाता था।



इसका अभिप्राय यह था की किसी राष्ट्र की सम्पन्नता देश के अन्दर जमा सोना-चाँदी पर निर्भर करती है, जिस देश के पास जितना अधिक खजाना होगा वह देश उतना ही अधिक संपन्न होगा।

इसके द्वारा प्रद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ और लोगो ने पूँजी का संचय आरम्भ किया।

1600 ई. के बाद तो समुद्र पार के व्यापार के लिए अंग्रेजी, डच तथा फ़्रांसिसी कंपनियों का ताँता लग गया।

इसमें सबसे सौभाग्यशाली तथा प्रख्यात हुई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, इसकी स्थापना 1600 ई. में हुई थी।

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