भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग |india’s Northern mountains

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हमारा देश भारत बहुत ही विशाल है यह कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक है गुजरात से मिजोरम तक एक है भारत क्षेत्रफल की द्रिष्टि से विश्व का 7 सबसे बड़ा देश है भारत का कुल क्षेत्रफल: 3,287,263 वर्ग कि.मी भारत के हर जगहों में अलग अलग विविधता और जलवायु है तो आज हम जानेंगे भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग के बारे में।

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भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग

इसमें हिमालय, हिन्दुकुश एवं पटकाई पर्वत श्रृंखलाए (mountain ranges) शामिल है इसका निर्माण भारतीय एवं यूरेशियन प्लेटो के विवर्तनिक विभोक्ष (tectonic disturbance) के फलस्वरूप 5 करोड़ साल पहले आरम्भ हुआ, इसमें दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखलाए (mountain ranges) स्थित है।

ये ध्रुवीय प्रदेश से आने वाली ठंडी हवाओ को रोककर भारत को नैसर्गिक उष्णता प्रदान करते है साथ ही यह मानसूनी हवाओ को रोककर भारतीय भू-भाग में वर्षा भी करवाते है, देश के लगभग 10.6% क्षेत्र पर पर्वत 18.5% क्षेत्र पर पहाड़िया 27.7% पर पठार तथा 43.2% पर मैदान विस्तृत है।

यह नवीन मोड़दार पर्वतमाला है साथ ही यह पर्वत अनेक पर्वतो का समूह हैं इसके मुख्य श्रेणी को हिमालय श्रेणी के नाम से जानते है इस हिमालय के उत्तरी पश्चिमी भाग में काराकोरम, लद्दाख, जास्कर श्रेणिया मिलती है, जबकि दक्षिण-पूर्व में नागा, पट्कोई, मणिपुर एवं अराकान श्रेणिया मिलती है।



भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग |india’s Northern mountains | northern mountainous region of india

+ वलयो की तीव्रता तथा निर्माण के आयु के आधार पर हिमालय को चार सामान्तर क्षेत्रो में बांटा गया है –

  1. ट्रांस हिमालय / तिब्बत हिमालय
  2. वृहत / महान हिमालय
  3. लघु / मध्य हिमालय
  4. बाह्य हिमालय / शिवालिक

ट्रांस हिमालय (तिब्बत हिमालय)

ट्रांस हिमालय मूलतः यूरेशिया प्लेट का एक खंड है इसका निर्माण हिमालय से भी पहले हो चूका था साथ ही यह अवसादी चट्टानों का बना हुआ है। भारत की सबसे ऊँची छोटी k2 या गाडविन ऑस्टिन (8811 मी.) है जो काराकोरम की सर्वोच्च छोटी है यह भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग का प्रमुख हिस्सा है।

महान हिमालय (वृहत हिमालय)

भारत का उत्तरी पर्वतीय भूभाग का शान है यह इसकी औसत ऊँचाई 6100मी. लम्बाई 2500km और चौड़ाई 25km है, यह पश्चिम में नंगा पर्वत से पूर्व में नामचाबरवा पर्वत तक स्थित है वृहत हिमालय (महान हिमालय) मध्य हिमालय से मेन सेंट्रल थ्रस्ट के द्वारा अलग होती है साथ ही विश्व की सर्वोच्च छोटी माउंट एवेरेस्ट इसी हिमलय पर स्थित है जिसकी ऊँचाई 8,849मी. है।



लघु या मध्य हिमालय

लघु या मध्य हिमालय की औसत ऊँचाई 1800 से 3000मी. है पीरपंजाल श्रेणी इसका पश्चिमी विस्तार है, इस श्रेणी के दक्षिण-पूर्व की ओर धौलधा, नाग, रीवा मसूरी आदि श्रेणिया पाई जाती है, इन्ही श्रेणियों पर नैनीताल, शिमला, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, दार्जिलिंग एवं डलहौजी नगर स्थित है मध्य और महान हिमालय के बिच पश्चिम में कश्मीर की घाटी तथा पूर्व में काठमांडू घाटी है, यहाँ पर कोणधारी वन मिलते है तथा ढालो पर छोटे-छोटे घास के मैदान पाए जाते है जिन्हें कश्मीर में मर्ग (गुलमर्ग, सोनमर्ग) और उत्तराखंड में वुग्याल और पयार कहते है।

बाह्य हिमालय (शिवालिक)

बाह्य हिमालय (शिवालिक) की औसत ऊँचाई 900 से 1200मी. के बीच है, शिवालिक एवं मध्य हिमालय के बिच अनेक घाटिया पाई जाती है इसको पश्चिम एवं मध्य भाग दून जैसे देहरादून और पूर्व में द्वार जैसे हरिद्वार कहते है हिमालय की दो घुमाव युक्त और मोड़दार भुजाये है।

इन्हें हिन्दुकुश, सुलेमान और किरधर श्रेणियों के नाम से जाना जाता है, इसमें खैबर, बोलन और गोमल आदि दर्रे है जबकि दूसरी ओर उत्तर-पूर्वी में गारो, खासी, जयंतिया, पट्कोई, लुसाई की पहाड़िया आदि है, एवं इसी का घुमावदार विस्तार भारत म्यांमार सीमा पर अराकानयोमा पर्वत के नाम से फैला है।

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