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History

भारतीय गणतंत्र की स्थापना |Establishment of Indian Republic

द्वितीय विश्वयुद्ध

(भारतीय गणतंत्र की स्थापना |Establishment of Indian Republic ) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इंग्लैंड यह समझ चूका था की अब भारत में उसका राज नहीं चलेगा, इसीलिए वहा के तत्कालीन एटली को 1946 ई. में घोषणा करना पड़ा की वे जल्दी ही भारत छोड़ना चाहते है। फिर उन्होंने सत्ता हस्तांतरण के संबंध में भारतीयों नेताओ से बातचीत करने का विचार किया। 

उन्होंने अपने कैबिनेट के तीन मंत्रियो को अंतरिम सरकार बनाने और संविधान गठित करने का प्रस्ताव रखा, प्रस्ताव में कहा गया की संविधान सभा में प्रांतीय विधान सभाओ द्वारा चुने हुए व्यक्ति और भारतीय रियासतों के राजाओ द्वारा मनोनीत व्यक्ति शामिल होंगे इसे कैबिनेट मिशन कहते है। 




डॉ. राजेंद्र प्रसाद

अंतरिम सरकार की स्थापना – इस प्रकार वायसराय लार्ड वेवेल के आमंत्रण पर केंद्र में पंडित जवाहर लाला नेहरु के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार 1946 ई. में बनी। इसके अलावा डॉ राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा का गठन हुआ, जिसने दिसंबर 1946 ई. में अपना काम शुरू कर दिया लेकिन मुस्लिम लीग तथा राजाओ ने उसमे भाग नहीं लिया था। 

अंतरिम सरकार

लीग द्वारा पाकिस्तान की माँग

मो. अली जिन्ना

मुस्लिम लीग पृथक पाकिस्तान की माँग पर अड़ी हुई थी, लेकिन कांग्रेस शुरू से ही भारत का विभाजन नहीं चाहती थी किन्तु लीग अपनी माँग पर जोर देने लगी वह पहले अंतरिम सरकार में भी शामिल नहीं हुई थी मगर बाद में शामिल होकर उसके कार्यो में बाधा पहुचाने लगी।

लीग की सीधी कार्यवाही दिवस – अब मुस्लिम लीग हर कीमत पर पाकिस्तान चाहने लगी इसलिए उसने 16 अगस्त 1946 ई. को ‘सीधी कार्यवाही दिवस’ घोषित किया जिसके कारण बंगाल, बिहार, मुंबई आदि स्थानों में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। 

इन दंगो से हिन्दू – मुस्लिम में भयंकर मारकाट मच गयी इन दंगो को रोकने के लिए अंग्रेजो ने कोई विशेष प्रयास नहीं किया, इस प्रकार कुछ ही महीनो में बहुत से लोग मारे गए और लाखो लोग बेघर हो गए। 

परन्तु इस समय छत्तीसगढ़ जो मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था यहाँ किसी प्रकार का दंगा फसाद नहीं हुआ क्योकि यहाँ शांति स्थापित थी, सांप्रदायिक दंगो से गांधी जी अत्यंत दुखी हुए उन्होंने दंगाग्रस्त क्षेत्रो का दौरा किया और शान्ति स्थापना का प्रयास किया।

माउंटबेटन योजना – अराजकता के ऐसे वातावरण में मार्च 1947 ई. में लार्ड माउंटबेटन नए वायसराय बनकर भारत आये, उन्होंने दोनों सम्प्रदायों के प्रमुख नेताओ से बातचीत की, इसके बाद उन्होंने भारत का विभाजन कर दो स्वतंत्र राष्ट्रों – भारत और पाकिस्तान निर्माण योजना प्रस्तुत की। 




भारतीय गणतंत्र की स्थापना |Establishment of Indian Republic

भारत विभाजन

कांग्रेस शुरू से ही भारत की एकता और अखंडता चाहती थी मगर उसने हिन्दू – मुस्लिम के आपसी झगडे का अंत करने के लिए भारत विभाजन को ना चाहते हुए भी स्वीकार कर लिया, इस प्रकार पश्चिम बंगाल, पूर्वी बंगाल, सिंध और पश्चिमोत्तर सीमा – प्रान्त को मिलकर पाकिस्तान पृथक राष्ट्र बना। 

अखंड भारत का विभाजन भारतीयों के लिए अत्यंत दुखद घटना थी, विभाजन के बाद भी विभिन्न स्थानों में हिन्दू – मुस्लिम दंगे हुए, विशेष कर पंजाब और बंगाल में, ये दंगे अविश्वाश का वातावरण बनाते हैं। इनसे धन और जन की हानि होती है, ये समाज के विकाश में बाधक होते है इसलिए विभिन्न धर्मो के लोगो को हमेशा मिलजुलकर रहना चाहिए। 

भारत विभाजन से कई आर्थिक समस्याए भी पैदा हुई, जूट और सूती कपडे के अधिकांश कारखाने भारत में रह गए मगर जूट और कपास उत्पादन के अधिकांश क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए, इससे जूट और सूती कपडे के कई कारखाने बंद हो गए, गेहू चावल और सिंचाई के अधिकांश क्षेत्र पाकिस्तान के क्षेत्र में चले गए इससे कुछ दिनों तक भारत में अन्न का अभाव भी रहा। 




भारतीय गणतंत्र की स्थापना |Establishment of Indian Republic

(अ) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

माउंटबेटन योजना के आधार पर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम इंग्लैंड के संसद द्वारा 18 जुलाई 1947 ई. को पारित किया गया, इसमें व्यवस्था थी की 15 अगस्त 1947 ई. को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों का रूप ग्रहण करेंगे इसके बाद उन पर इंग्लैंड का कोई अधिकार नहीं रहेगा। 

स्वतंत्रता की घोषणा – इस तरह 14 अगस्त की आधी रात के बाद जब 15 अगस्त 1947 ई. की तारीख शुरू हुई, तब पं जवाहर लाला नेहरु ने भारत के स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए कहा – “भारत में जीवन और स्वतंत्रता का उदय हुआ” संविधान सभा स्वतन्त्र भारत की संसद के रूप में काम करने लगी। हमारे स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधान मंत्री पं जवाहर लाल नेहरु और प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड माउंट बेटन बने।

पं जवाहर लाल नेहरु द्वारा 15 अगस्त की सुबह दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्र भारत का तिरंगा झंडा फहराया गया, सम्पूर्ण देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी तत्कालीन खाद्य मंत्री आर.के. पाटिल ने तिरंगा झंडा फहराया इस प्रकार नए भारत का निर्माण कार्य शुरू हो गया।

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(ब). देशी रियासतों – रजवाड़ो का विलय

सरदार वल्लभ भाई पटेल

स्वतंत्र भारत के सामने कई तात्कालिक कार्य थे, पहला कार्य था देश में राजनीतिक एकता स्थापित करना, 1947 में अंग्रजो द्वारा सीधे तौर पर शासित होनेवाले इलाको के अलावा करीब 500 से ज्यादा स्वतंत्र देसी रियासते थी जहा अंग्रजो का शाशन नहीं था। स्वतंत्रता के घोषणा के समय यह व्यवस्था हुई थी की इंग्लैंड से भारत के स्वतंत्र होने के साथ साथ सभी देसी रियासते भी स्वतंत्र हो जाएगी।

लेकिन इन रियासतों के स्वतंत्र बने रहने से भारत की एकता और सुरक्षा खतरे में पड़ जाती इसलिए देसी रियासतों के विलय का कार्य तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को सौंपा गया, सरदार पटेल छत्तीसगढ़ के रियासतों के विलय हेतु दिसम्बर 1947 ई. में नागपुर भी आये उनके समझाए जाने से यहाँ के कुल 14 रियासतों का भारत में विलय हो गया।

इस प्रकार सरदार पटेल की सुझबुझ के कारण भारत की कुल 562 देशी रियासतों में से अधिकांश रियासतों ने स्वतंत्रता पूर्व ही भारत में विलय स्वीकार कर लिया था इसी सुझबुझ के कारण उन्हें “लौह पुरुष” कहा जाता है, अब उनके सामने जूनागढ़, कश्मीर और हैदराबाद का विलय शेष था।

1. जूनागढ़ का विलय

जूनागढ़ सौराष्ट्र की एक छोटी सी रियासत थी, वहा का नवाब पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था, परन्तु जूनागढ़ की जनता भारत में शामिल होना चाहती थी अतः जनता के दबाव के कारण नवाब पाकिस्तान भाग गया, इस प्रकार फरवरी 1948 ई. में जूनागढ़ भारत में विलीन हो गया।

2. कश्मीर का विलय

कश्मीर रियासत के राजा हरिसिंह ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया था परन्तु वह की जनता सेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में भारत में विलय की माँग कर रहे थे जब स्वतंत्रता के तुरंत बाद पाकिस्तान के प्रोत्साहन से सशत्र घुसपैठियों ने कश्मीर पर आक्रमण किया, तब राजा हरिसिंह ने कश्मीर के भारत में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, फिर भारतीय सैनिको की मदद से उन घुसपैठियो को कश्मीर से लात मारकर खदेड़ दिया गया।

3. हैदराबाद का विलय

हैदराबाद का निजाम पाकिस्तान की बहकावे में आकर स्वतंत्र ही रहना चाहता था, परन्तु वह की जनता स्वामी रामानंद तीर्थ के नेतृत्व में हैदराबाद का भारत में विलय का मांग कर रही थी, इनकी माँग को दबाने के लिए निजाम द्वारा उन पर अनेक अत्याचार किये गए अंततः भारतीय सैनिको द्वारा निजाम के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गयी और हैदराबाद रियासत भारत में विलीन हो गया।




भारतीय गणतंत्र की स्थापना |Establishment of Indian Republic

(स). नए संविधान का निर्माण

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर

इस बीच संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आम्बेडकर द्वारा स्वतंत्र भारत के नए संविधान के प्रारूप बनाने का कार्य 26 नवम्बर 1949 ई. को अंतिम रूप प्रदान किया गया मगर इसे 26 जनवरी 1950 ई. को लागू किया गया, इसलिए तब से यह दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान भारतीयों ने स्वतंत्रता समानता, बंधुत्व, मानवता तथा लोकतंत्र के राष्ट्रीय मूल्यों को स्वीकार किया था, इन्हें हमारे संविधान में महत्त्व दिया गया, हमारे संविधान में भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर नियमो का संकलन किया गया, जिसके अनुसार शाशन चलाया जाता है।

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